50 से ज्यादा लोगों की किडनी बदलने का चौंकाने वाला मामला
कानपुर | अवैध रूप से किडनी की खरीद-फरोख्त कर ट्रांसप्लांट करने वाले गिरोह के तार विदेश तक फैले हैं। गिरोह ने पिछले दो साल में अवैध ढंग से 50 से अधिक मरीजों की किडनी ट्रांसप्लांट की। 3 मार्च को भी आहूजा हॉस्पिटल में दक्षिण अफ्रीका की महिला अरेबिका की अवैध तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट की गई थी। 29 मार्च को इसी आहूजा अस्पताल में हुए अवैध ट्रांसप्लांट से गिरोह का पर्दाफाश हुआ। इसके बाद पुलिस ने गिरोह में शामिल इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) कानपुर की उपाध्यक्ष डॉ. प्रीति आहूजा, उसके पति डॉ. सुरजीत, दलाल शिवम अग्रवाल एवं तीन अस्पताल संचालकों को गिरफ्तार कर मंगलवार को जेल भेज दिया।
अवैध रूप से किडनी ट्रांसप्लांट की सूचना मिली
किडनी रैकेट का खुलासा करते हुए पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि रावतपुर थाने के दरोगा को अवैध रूप से किडनी ट्रांसप्लांट की सूचना मिली थी। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने काकादेव के नवीन नगर निवासी आरोपी डॉक्टर दंपती के केशवपुरम रोड स्थित आहूजा हॉस्पिटल, कल्याणपुर आवास विकास-एक स्थित प्रिया हॉस्पिटल, पनकी-कल्याणपुर रोड स्थित मेडलाइफ हॉस्पिटल में छापा मारा।पूछताछ में पुलिस को पता चला कि किडनी देने वाला युवक मूलरूप से बिहार का रहने वाला आयुष है। वह देहरादून में एमबीए के चौथे सेमेस्टर की पढ़ाई कर रहा है जबकि किडनी लेने वाली मरीज मुजफ्फरनगर निवासी पारुल तोमर हैं। किडनी ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया आहूजा हॉस्पिटल में हुई थी। इसके बाद आरोपियों ने दोनों मरीजों को गॉल ब्लैडर (पित्त की थैली) की पथरी का मरीज बताकर मेडलाइफ और प्रिया हॉस्पिटल में भर्ती करा दिया था। पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीमें गिरोह के अन्य सदस्य व डॉक्टरों की तलाश में दिल्ली, नोएडा के लिए रवाना हो गई हैं। जांच के दायरे में आए तीन अन्य नर्सिंगहोम संचालकों को देर रात पुलिस ने हिरासत में ले लिया। जांच में पता चला कि दलाल शिवम आठवीं पास है। वह खुद को डॉक्टर बताकर लोगों को फंसाता था।
नोएडा से आती थी डॉक्टरों की टीम, पुलिस ने तेज की तलाश
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि ट्रांसप्लांट करने वाले नोएडा निवासी डॉ. रोहित, डॉ. अफजाल, डॉ. वैभव और डॉ. अनुराग की तलाश की जा रही है। डॉ. अफजाल और अन्य आरोपी टेलीग्राम चैनल के माध्यम से एक दूसरे के संपर्क में रहते थे। जरूरतमंदों से पांच से 10 लाख रुपये में किडनी खरीदते थे और उसे 60 लाख से एक करोड़ रुपये तक में बेच देते थे। काली कमाई का सबसे बड़ा हिस्सा डॉ. रोहित लेता था। दिल्ली एनसीआर के भी कुछ अन्य डॉक्टर गिरोह में शामिल है। इनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें रवाना हो गई हैं।
टेलीग्राम के जरिये रहते थे संपर्क में, एक करोड़ तक में बेचते थे किडनी
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि ट्रांसप्लांट करने वाले डॉ. रोहित, मरीज पारुल से संपर्क करने वाले नोएडा के अफजाल, वैभव और अनुराग की तलाश की जा रही है। उन्होंने बताया कि अफजाल और अन्य आरोपी टेलीग्राम चैनल के माध्यम से एक दूसरे के संपर्क में हैं। आरोपी जरूरतमंदों को पैसों का लालच देकर पांच से 10 लाख रुपये में किडनी खरीदते थे। उसे अमीर परिवार के मरीजों को 60 लाख से एक करोड़ रुपये तक में बेच देते थे।
90 लाख रुपये में बेची किडनी
शुरुआती जांच में पता चला था कि दलाल शिवम का आयुष से दस लाख रुपये में किडनी का सौदा हुआ था। किडनी निकालने के बाद शिवम ने आयुष को 9.5 लाख रुपये ही दिए थे। शेष रकम मांगने पर शिवम टालमटोल करने लगा। आयुष ने इसकी जानकारी पुलिस को दी। पुलिस जांच के बाद पूरे रैकेट का भंडाफोड़ हुआ। मंगलवार को पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने आयुष को छह लाख रुपये में किडनी देने के लिए राजी कर लिया था।
मेडलाइफ कागजों पर सील पड़ताल में संचालित मिला
किडनी कांड में स्वास्थ्य विभाग ने दूसरे दिन तीन अस्पतालों में से मेडलाइफ अस्पताल को सील कर दिया और बाकी दो अस्पतालों को बंद करने के लिए नोटिस जारी किया है। संवाद न्यूज एजेंसी ने मंगलवार अस्पतालों की पड़ताल की तो तीनों अस्पताल ही खुले नजर आए। मेडलाइफ व आहूजा हॉस्पिटल खुले मिले लेकिन सन्नाटा पसरा था जबकि प्रिया अस्पताल में रोगियों को भर्ती करने के साथ ही डॉक्टर उनका इलाज भी करते मिले। एसीएमओ डॉ. रमित रस्तोगी ने बताया कि मेडलाइफ को सील कर दिया गया है। आहूजा और प्रिया अस्पताल को जांच पूरी होने तक अस्पताल बंद रखने का नोटिस दिया गया है। इस दौरान उन्हें भर्ती रोगियों को दूसरी जगह शिफ्ट करने और अस्पतालों को बंद रखने के निर्देश दिए हैं।
चलते मिले अवैध अस्पताल, डर से नहीं पहुंचे डॉक्टर
अवैध अस्पतालों की स्थिति जानने के लिए संवाद न्यूज एजेंसी की ओर से मंगलवार को कल्याणपुर में संचालित अस्पतालों की पड़ताल की गई। अवैध अस्पताल भी संचालित मिले। ये वे अस्पताल थे जिन पर स्वास्थ्य विभाग ने खुद नोटिस चिपकाया था या उन्हें सील किया था। हालांकि इन अस्पतालों में डर की वजह से डॉक्टर नहीं पहुंचे।
आरोपों की पुष्टि होने पर आईएमए लेगा एक्शन
डॉ. प्रीति और पैथोलॉजिस्ट पति डॉ. सुरजीत आहूजा की गिरफ्तारी के बाद आईएमए ने आपात बैठक बुलाई। विचार-विमर्श के बाद जांच कमेटी गठित की गई। यह तय हुआ कि सारे तथ्यों को परखने, डॉ. प्रीति से बात करने पर सत्य पता किया जाएगा। इसके बाद एक्शन लिया जाएगा। एसोसिएशन ने अपने नेशनल हेडक्वार्टर को इस संबंध में सूचित कर निर्देश मांगे हैं। परेड स्थित आईएमए भवन में हुई बैठक में कहा गया कि अभी इस मामले में डॉ. प्रीति आहूजा और डॉ. सुरजीत से किसी की बात नहीं हुई। आईएमए अध्यक्ष डॉ. अनुराग मेहरोत्रा ने बताया कि बुधवार या गुरुवार को वह उपाध्यक्ष डॉ. प्रीति से मिलेंगे। सत्यता का पता करने के बाद एक्शन तय किया जाएगा। नेशनल हेडक्वार्टर से भी निर्देश आएंगे। जांच कमेटी में एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. मेहरोत्रा और सचिव डॉ. शालिनी मोहन हैं। डॉ. शालिनी ने कहा कि डॉ. प्रीति फिजीशियन है और डॉ. सुरजीत पैथोलॉजिस्ट। इनमें कोई सर्जन नहीं है। दोनों ही प्रत्यारोपण नहीं कर सकते।
हो सकती है ये सजा
किडनी कांड रैकेट के आरोपियों पर मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994 की धारा 18, 19, 20 एवं बीएनएस की 143 और 3(5) की धाराएं लगाई गई हैं। धारा 18 अवैध रूप से मानव अंग निकालने से संबंधित है। इसमें 10 साल तक की कैद और 20 लाख रुपये तक का जुर्माना भुगतना पड़ सकता है। धारा 19 में इसमें किसी को मानव अंग देने के लिए रजामंद करने पर दस साल तक की सजा और एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना भुगतना पड़ सकता है। धारा 20 में पांच साल तक की सजा या 20 लाख तक का जुर्माना भुगतना पड़ सकता है। मेडिकल प्रोफेशनल (डॉक्टर आदि) शामिल होने पर उनका लाइसेंस भी रद्द हो सकता है। वहीं बीएनएस की धारा 143 में एक से अधिक व्यक्तियों का दुर्व्यापार करने वाले को उम्र कैद और जुर्माना से भरना पड़ सकता है। धारा 3(5) सामूहिक आपराधिक दायित्व को बताती है। जांच में सामने आए अस्पतालों के अलावा सात अन्य अस्पताल अवैध ढंग से किडनी ट्रांसप्लांट करने के मामले से जुड़े हैं। इनमें से एक अस्पताल लखनऊ और छह कानपुर के हैं। स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की टीमें इनकी गहनता से जांच कर रही हैं।

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