ग्वादर एयरपोर्ट का उद्घाटन, पर खाली – न विमान, न यात्री दिखते
ग्वादर। आर्थिक दिवालियापन का सामना कर रहे पाकिस्तान ने कुछ सालों पहले ग्वादर इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन किया था। उद्घाटन के मौके पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा था कि ग्वादर एयरपोर्ट बनने से न केवल बलूचिस्तान बल्कि पूरे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को फायदा मिलेगा।
अक्टूबर 2024 में बनकर तैयार हुआ ग्वादर एयरपोर्ट पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में स्थित है जो बेहद ही गरीब और अशांत इलाका है। चीन ने यह एयरपोर्ट पाकिस्तान के साथ हुए चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के तहत बनाया है। अरबों डॉलर का यह प्रोजेक्ट चीन के पश्चिमी शिनजियांग प्रांत को अरब सागर के जरिए पाकिस्तान से जोड़ेगा।
एयरपोर्ट बनाने के पीछे क्या है चीन की चाल?
गौरतलब है कि ग्वादर एयरपोर्ट का उद्घाटन तो हो गया है, लेकिन वहां न तो विमान दिख रहे हैं और न ही कोई यात्री।
सवाल ये है कि धूल फांक रहे इस एयरोपर्ट को पाकिस्तान-चीन ने मिलकर बनाया क्यों? इसका जवाब पाकिस्तान-चीन संबंधों के विशेषज्ञ और अंतरराष्ट्रीय संबंध विशेषज्ञ अजीम खालिद ने दी। बातचीत करते हुए उन्होंने कहा, यह हवाई अड्डा पाकिस्तान या ग्वादर के लिए नहीं है बल्कि चीन के लिए है। चीन का उद्देश्य है कि वो अपने नागरिकों को ग्वादर और बलूचिस्तान तक सुरक्षित रास्त प्रदान कर सकें।
बलूचिस्तान प्राकृतिक संसाधनों से संपन्न और रणनीतिक रूप से काफी अहम है। यह बात चीन और पाकिस्तान दोनों जानते हैं। चीन ने इस इलाके में कई प्रोजेक्ट भी शुरू किए हैं।
'किले' में तब्दील हुआ बलूचिस्तान
जब CPEC समझौता हुआ था तो पाकिस्तान ने कहा था कि वो बलूचिस्तान को 'पाकिस्तान का दुबई' बनाना चाहता है। इस इलाके में चीनी निवेशकों की सुरक्षा के लिए पाकिस्तान ने सैन्य उपस्थिति बढ़ा दी है। चीनी इंजीनियरों और पाकिस्तान के VIP's की सुरक्षा के लिए इलाके में बड़ी तादाद में चौकियां, कंटीले तार, बैरिकेड और निगरानी टावरों को बनाया गया है, जिसकी वजह से बलूचिस्तान की जनता परेशान है।
पाकिस्तान कर रहा बलूचिस्तान के लोगों का दोहन
बलूचिस्तान के अलगाववादी समूहों का कहना है कि पाकिस्तान की सरकार यहां के लोगों का शोषण करती है। बलूचिस्तान के लोगों को नौकरियों में पर्याप्त हिस्सेदारी नहीं दी जाती है। इलाकों के संसाधनों का दोहन किया जा रहा है। सबसे बड़ी बात है कि यहां के संसाधनों का फायदा बलूचिस्तान के लोगों को नहीं मिल पा रहा।
76 साल के ग्वादर निवासी खुदा बख्श हशीम ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए बताया, हम पहले पहाड़ों में या गांवों में रात भर पिकनिक मनाते थे, मजे करते थे। लेकिन अब हमसे पहचान मांगी जाती है, हम कौन हैं। कहां से आए हैं। हमारी पहचान मांगी जाती है। जो लोग हमसे पहचान पूछ रहे हैं उन्हें खुद अपनी पहचान बतानी चाहिए।
हशीम ने आगे कहा, "पहले कभी पानी की कमी नहीं होती थी न ही यहां के लोग कभी भूखा सोते थे। लेकिन यहां के संसाधनों के दोहन करने की वजह से इलाके में पानी सूख गया। रोजगार के अवसर भी खत्म हो गए।"

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