योग अपनाएं, लेकिन बांझपन की समस्या में डॉक्टर की सलाह लेना न भूलें
हर विवाहित महिला के जीवन में मां बनने की इच्छा बेहद स्वाभाविक और प्रबल होती है। हालांकि, कई बार कुछ सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं या अंदरूनी कारणों के चलते कुछ महिलाएं गर्भधारण करने में असमर्थ रह जाती हैं। अक्सर सही कारण समय पर पता न चल पाने के कारण इसका उचित उपचार कराना भी काफी कठिन हो जाता है।
गर्भधारण न होने की स्थिति और बांझपन से जुड़े सामाजिक पहलू
यदि कोई दम्पति पूरे एक वर्ष तक लगातार बिना किसी गर्भनिरोधक के संबंध बनाने के बाद भी संतान सुख प्राप्त नहीं कर पाता है, तो चिकित्सीय रूप से यह माना जाता है कि पति या पत्नी में से किसी एक को प्रजनन क्षमता से जुड़ी कोई समस्या है। यदि यह समस्या स्त्री पक्ष में होती है, तो इसे चिकित्सा और समाज की भाषा में बांझपन (इनफर्टिलिटी) कहा जाता है।
दुर्भाग्यवश, जो महिला किन्हीं कारणों से मां नहीं बन पाती है, उसे आज भी हमारे इस समाज में कई बार बहुत हीन दृष्टि से देखा जाता है। हालांकि, आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और प्राचीन योग पद्धति में इसके कई सटीक समाधान मौजूद हैं, बशर्ते सही समय पर इसके सटीक कारणों का पता लगाया जा सके।
बांझपन की समस्या से निपटने में बेहद लाभकारी है योग और 'चक्रासन'
प्राचीन योग विज्ञान में महिलाओं की कई आंतरिक शारीरिक समस्याओं का अचूक उपचार बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि नियमित रूप से 'चक्रासन' का अभ्यास करना प्रजनन संबंधी दिक्कतों और बांझपन की समस्या से जूझ रही महिलाओं के लिए शारीरिक रूप से बेहद लाभदायक साबित हो सकता है।
चक्रासन करने की सही और सुरक्षित विधि
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सबसे पहले अपने योग मैट पर पीठ के बल सीधे लेट जाएं।
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इसके बाद अपने घुटनों को मोड़ें और पैरों की एड़ियों को अपने नितंबों (हिप्स) से स्पर्श कराते हुए दोनों पैरों के बीच लगभग 10 से 12 इंच की दूरी बनाकर रखें।
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अब अपनी बाहों को ऊपर की ओर उठाएं और कोहनियों को मोड़ लें। अपनी हथेलियों को कंधों के ठीक ऊपर और सिर के करीब जमीन पर टिका लें।
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गहरी सांस लें और धीरे-धीरे अपने धड़ (कमर और छाती वाले हिस्से) को ऊपर की तरफ उठाते हुए अपनी पीठ को धनुषाकार मोड़ें।
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अपने सिर को हल्के से नीचे की ओर लटकता हुआ छोड़ दें और अपनी बाहों तथा पैरों को पूरी तरह से यथासंभव तान लें।
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इस अवस्था में आने के बाद धीरे-धीरे लंबी सांस लें और धीरे-धीरे ही सांस को बाहर छोड़ें (प्राणायाम की तरह)।
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जब तक आपके लिए संभव हो सके, इस विशेष योग मुद्रा को बनाए रखें।
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इसके बाद अपने शरीर को संभालते हुए धीरे-धीरे नीचे की ओर लाएं और आरंभिक अवस्था में लौट आएं, ताकि आपका सिर जमीन पर ही टिका रहे।
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इसके बाद शरीर के शेष बचे हुए हिस्से को भी नीचे जमीन पर ले आएं और कुछ पल के लिए विश्राम करें।
योग की भाषा में इसे एक चक्र पूरा होना माना जाता है। अपनी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार आप इस आसन के 4 से 5 चक्र आसानी से कर सकती हैं।

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