विधानसभा में सरकार ने जीता विश्वास, कांग्रेस का अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से गिरा
रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान सरकार को घेरने के लिए विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार राजनीतिक घमासान देखने को मिला। करीब 15 घंटे तक चली तीखी बहस के बाद, संख्या बल के आधार पर विपक्ष का यह अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से अस्वीकृत कर दिया गया। कांग्रेस ने अपनी सरकार की 136 सप्ताह की कथित विफलताओं की एक लंबी सूची को आधार बनाकर सदन में यह प्रस्ताव पेश किया था।
विपक्ष का तीखा हमला और प्रमुख मुद्दे
अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा की शुरुआत नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने की। कांग्रेस ने सरकार की घेराबंदी के लिए कई संवेदनशील मुद्दे उठाए:
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प्रमुख आरोप: हसदेव जंगल में पेड़ों की कटाई, बलौदाबाजार कलेक्टोरेट में हुई आगजनी की घटना, गिरती कानून-व्यवस्था, महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध और विपक्षी विधायकों की उपेक्षा जैसे गंभीर आरोप लगाए गए।
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भूपेश बघेल और कवासी लखमा की टिप्पणी: पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार को एक 'अदृश्य शक्ति' द्वारा संचालित बताया और डीएपी खाद की कमी व कोरिया मामले की सीबीआई जांच पर सवाल खड़े किए। वहीं, विधायक कवासी लखमा ने बस्तर की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि हालात नहीं सुधरे तो अलग बस्तर राज्य की मांग उठ सकती है।
सीएम विष्णुदेव साय का पलटवार और सरकार की उपलब्धियां
अविश्वास प्रस्ताव का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विपक्ष पर जमकर निशाना साधा:
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औपचारिकता का आरोप: मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस का यह प्रस्ताव केवल एक राजनीतिक औपचारिकता है। उन्होंने सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि भाजपा प्रधानमंत्री मोदी की गारंटी पर काम कर रही है, जिसमें महिलाओं, किसानों, युवाओं और बुजुर्गों के लिए अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं लागू की गई हैं।
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आदिवासी मुख्यमंत्री पर तंज: मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कांग्रेस को यह हजम नहीं हो रहा है कि एक गांव का आदिवासी बेटा मुख्यमंत्री बना है। उन्होंने दावा किया कि आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा 70 से अधिक सीटों के साथ जीत दर्ज करेगी और अगले 25 साल तक कांग्रेस सत्ता में वापसी नहीं कर सकेगी।
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हेल्पलाइन नंबर: उन्होंने विपक्ष को चुनौती देते हुए कहा कि हमारे नवाचारों से कांग्रेस बौखलाई हुई है। यदि कोई समस्या है तो नागरिक मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर 1076 पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
सदन में हंगामे और आरोप-प्रत्यारोप का दौर
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बलौदाबाजार कांड पर विवाद: उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के बलौदाबाजार आगजनी कांड पर दिए गए बयान के बाद सदन में भारी हंगामा हुआ। सत्ता पक्ष ने कांग्रेस पर उपद्रवियों को उकसाने का आरोप लगाया। हिडमा के समर्थन में लगे नारों के कारण भी सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी।
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घोटालों की सरकार: उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कांग्रेस के कार्यकाल को 'घोटालों और झूठ की सरकार' करार दिया। वहीं, पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने कांग्रेस के आरोप पत्र को बेहद कमजोर बताते हुए कहा कि इसमें से 56 आरोप तो दोहराए गए हैं।
अंततः, 15 घंटे की मैराथन बहस के बाद मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों के प्रभावी जवाबों के दम पर सत्ता पक्ष ने कांग्रेस के आरोपों को बेबुनियाद साबित किया और अविश्वास प्रस्ताव को संख्या बल के आधार पर सदन में गिरा दिया।

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