दिल्ली में कांग्रेस ने फूंकी नई जान, हर जिले में बनाई नई कार्यकारिणी
नई दिल्ली: देश की राजधानी में करीब डेढ़ दशक के लंबे इंतजार के बाद प्रदेश कार्यकारिणी का गठन करने के बाद अब दिल्ली कांग्रेस ने एक और बड़ा कदम उठाया है। पार्टी ने दिल्ली के सभी 14 जिला संगठनों के लिए अपनी नई कार्यकारिणी की आधिकारिक घोषणा कर दी है। कांग्रेस का शीर्ष प्रादेशिक नेतृत्व इस कदम को जमीनी स्तर पर संगठन को पुनर्जीवित करने और उसमें नई जान फूंकने की एक बड़ी शुरुआत के रूप में देख रहा है।
नेताओं की नजरें और माइक्रो-मैनेजमेंट का नया फॉर्मूला
राजनीतिक विश्लेषकों और विरोधी दलों के बीच इस समय जिला कमेटियों के गठन से ज्यादा चर्चा पार्टी की उस खास रणनीति की हो रही है, जिसे कांग्रेस पहली बार लागू करने जा रही है। पार्टी इस बार बेहद सूक्ष्म स्तर पर प्रबंधन (माइक्रो-मैनेजमेंट) का एक बिल्कुल नया ढांचा तैयार कर रही है। कांग्रेस की योजना अब जमीनी स्तर पर हर मंडलम में 11 सदस्यों की और ब्लॉक स्तर पर 31 सदस्यों की एक मजबूत टीम को अंतिम रूप देने की है, जो सीधे जनता के बीच रहकर काम करेगी।
बूथ स्तर पर 'सेक्टर' का एकदम नया प्रयोग
इस नए संगठनात्मक ढांचे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि पार्टी ब्लॉक और मंडलम के बीच 'सेक्टर' की एक नई व्यवस्था शुरू करने जा रही है। राजनीतिक गलियारों में अब इस बात को लेकर कौतूहल है कि क्या कांग्रेस का यह नया प्रयोग दिल्ली की सियासत में पहले से ही बेहद मजबूत और स्थापित 'कमल' (भाजपा) और 'झाड़ू' (आप) के बूथ-मैनेजमेंट को कड़ी टक्कर दे पाएगा। कई जानकार इसे आगामी चुनावों से ठीक पहले रूठे हुए कार्यकर्ताओं को ऊंचे पद देकर शांत करने की एक प्रशासनिक कवायद के रूप में भी देख रहे हैं।
प्रदेश नेतृत्व का दावा और आगामी रणनीति
तमाम राजनीतिक कयासों के बीच दिल्ली कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने संगठन के इस नए स्वरूप को लेकर बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि पार्टी का मुख्य उद्देश्य अपने जमीनी कार्यकर्ताओं को सशक्त बनाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में दिल्ली में होने वाले किसी भी चुनाव में कांग्रेस पूरी तरह से संगठित और बेहद मजबूत नेटवर्क के साथ मैदान में उतरेगी, ताकि विरोधियों को कड़ी चुनौती दी जा सके।
जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को एकजुट करने की चुनौती
इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती इसे कागजों से निकालकर धरातल पर उतारने की होगी। जिला कमेटियों की घोषणा के बाद पार्टी के भीतर नए और पुराने चेहरों के बीच तालमेल बिठाना भी एक बड़ा काम होगा। आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि कांग्रेस का यह नया दांव कार्यकर्ताओं में कितना नया जोश भर पाता है और आगामी चुनावी नतीजों पर इसका क्या असर पड़ता है।

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