मुंबई में सियासी घमासान, सफेद पट्टी विवाद बना टकराव की वजह
मुंबई: मुंबई की सड़कों पर जैन संतों के लिए बनाई गई सफेद पट्टियों को लेकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) और जैन समुदाय के बीच का विवाद अब और ज्यादा गहरा गया है। घाटकोपर, दादर, गिरगांव और चर्नी रोड जैसे इलाकों से शुरू हुआ यह गतिरोध अब सीधे तौर पर जैन मुनि निलेशचंद्र और मनसे नेता संदीप देशपांडे के बीच तीखी बयानबाजी में बदल चुका है, जिससे शहर का राजनीतिक और सामाजिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है।
जैन मुनि के 'चूड़ियां' वाले बयान पर छिड़ा विवाद
यह पूरा विवाद उस समय और आक्रामक हो गया जब जैन मुनि निलेशचंद्र ने मनसे के विरोध पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जैन समाज ने चूड़ियां नहीं पहन रखी हैं और समय आने पर इसका उचित जवाब दिया जाएगा, हालांकि उन्होंने अपने समाज से शांति बनाए रखने की भी अपील की। मुनि ने तर्क दिया कि सफेद रंग शांति का प्रतीक है और देश के कई मंदिरों में इसका उपयोग होता है। इसके साथ ही उन्होंने मनसे नेता संदीप देशपांडे को भिवंडी जाने की चुनौती देते हुए कहा कि वहां चारों ओर हरा रंग दिखाई देता है, वे वहां जाकर विरोध क्यों नहीं करते? उनके इस बयान के बाद विवाद में एक नया मोड़ आ गया।
मनसे का तीखा पलटवार और महिलाओं का सम्मान
जैन मुनि के इस बयान पर मनसे नेता संदीप देशपांडे ने बेहद कड़ा ऐतराज जताया और तीखा पलटवार किया। देशपांडे ने कहा कि ‘हमने चूड़ियां नहीं पहन रखी हैं’ जैसे मुहावरों का इस्तेमाल करना महिलाओं के प्रति एक पिछड़ी और गलत मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने मराठी इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि हमारा इतिहास राजमाता जीजाबाई, पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होलकर और झांसी की रानी जैसी वीर महिलाओं से भरा पड़ा है, जिन्होंने अपनी ताकत का लोहा मनवाया था; ऐसे में महिलाओं को कमजोर समझने वाली सोच को बिल्कुल स्वीकार नहीं किया जा सकता।
इसके साथ ही देशपांडे ने मुनि की चुनौती का जवाब देते हुए कहा कि अगर सफेद पट्टियां बनाने वालों में इतनी ही हिम्मत है, तो वे मुंबई के मुंब्रा या पायधुनी जैसे मुस्लिम बहुल इलाकों की सड़कों पर ऐसी पट्टियां बनाकर दिखाएं। उन्होंने याद दिलाया कि मनसे ने पहले भी मस्जिदों से अवैध लाउडस्पीकर हटाने के लिए बड़ा आंदोलन चलाकर अपनी ताकत दिखाई है।
धर्म को व्यक्तिगत रखने और 'जैन गांव' न बनने देने की चेतावनी
मनसे नेता ने सार्वजनिक सड़कों पर बिना अनुमति रंग-रोगन करने को एक बार फिर ‘सांस्कृतिक आतंकवाद’ करार दिया। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सार्वजनिक संपत्तियों पर इस तरह के धार्मिक अतिक्रमण को आज नहीं रोका गया, तो भविष्य में मुंबई के कई इलाके अपनी मूल और क्षेत्रीय पहचान खो देंगे और वे ‘जैन गांव’ में तब्दील हो जाएंगे। उन्होंने साफ किया कि मनसे ऐसे किसी भी प्रयास को मुंबई में सफल नहीं होने देगी। देशपांडे ने जोर देकर कहा कि किसी भी धर्म का पालन व्यक्तिगत स्तर पर या केवल धार्मिक परिसरों (मंदिरों/स्थानकों) के भीतर तक ही सीमित रहना चाहिए और जब बात सार्वजनिक स्थानों की आए, तो सभी को सरकारी नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा।
गौरतलब है कि बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि सड़कों पर ऐसी पट्टियां बनाने की कोई अनुमति नहीं थी, जिसके बाद प्रशासन ने कई जगहों से इन सफेद पट्टियों को साफ करवा दिया है।

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