सियासी विवाद तेज: हेमामालिनी बोलीं—ममता सरकार ने बदल दिया कार्यक्रम स्थल
नई दिल्ली: लोकसभा सांसद और प्रसिद्ध अभिनेत्री हेमा मालिनी ने आज संसद के जीरो ऑवर (शून्यकाल) में पश्चिम बंगाल सरकार पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों से उनकी सांस्कृतिक कार्यक्रमों के स्थल बार-बार बदले जा रहे हैं. इस मुद्दे पर ईटीवी भारत से बात करते हुए सांसद हेमा मालिनी ने कहा कि ये राजनीतिक प्रतिशोध है.
उन्होंने आगे कहा कि बंगाल कला-संस्कृति का राज्य है, वहां महिला मुख्यमंत्री हैं, फिर भी उन्हें केवल भाजपा सांसद होने के कारण परेशान किया जा रहा है. हेमा मालिनी ने आगे कहा कि , “बंगाल कला और संस्कृति की भूमि है. यहां की परंपरा में नृत्य, संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का विशेष सम्मान है. लेकिन दुर्भाग्य से पिछले कई सालों से मेरे कार्यक्रमों का स्थल राज्य सरकार द्वारा बार-बार बदला जा रहा है.
हेमा मालिनी ने कहा, "मैंने कई बार स्थानीय प्रशासन से संपर्क किया, लेकिन हर बार कोई न कोई बहाना बनाकर स्थल बदल दिया जाता है." उन्होंने आगे कहा, "महिला मुख्यमंत्री होने के बावजूद जब एक महिला भाजपा सांसद को इस तरह परेशान किया जाता है तो यह चिंताजनक है.
उन्होंने सवाल किया कि, क्या भाजपा सांसद होने का यही मतलब है कि उनके सांस्कृतिक कार्यक्रमों को रोका जाएगा. उन्होंने कहा कि, बंगाल की जनता कला प्रेमी है, लेकिन सरकार की यह राजनीतिक संकुचितता कला को भी प्रभावित कर रही है.
सांसद ने यह भी उल्लेख किया कि यह समस्या केवल एक-दो बार नहीं, बल्कि वर्षों से चल रही है. उन्होंने सदन से भी अपील की कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर संज्ञान ले और पश्चिम बंगाल में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन में राजनीतिक हस्तक्षेप को रोका जाए.
यह घटना ऐसे समय में आई है जब पश्चिम बंगाल में राजनीतिक माहौल पहले से ही तनावपूर्ण हैं. भाजपा सांसदों और कार्यकर्ताओं का आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार विपक्षी दलों के कार्यक्रमों और सांस्कृतिक आयोजनों को जानबूझकर बाधित करती है.
हेमा मालिनी, जो उत्तर प्रदेश से लोकसभा सांसद हैं, लंबे समय से सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से देशभर में भारतीय कला को बढ़ावा देती रही हैं. उन्होंने सदन में कहा कि बंगाल जैसा राज्य, जहां रवींद्र संगीत, नृत्य और साहित्य की समृद्ध परंपरा है, वहां ऐसी राजनीतिक संकीर्णता कला के सम्मान के खिलाफ है. अभी तक पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. संसद में जीरो ऑवर में उठाए गए इस मुद्दे पर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है.

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