आरक्षण सीमा पर छिड़ी बहस, अब हाईकोर्ट तय करेगा राह
भोपाल। आज माननीय सुप्रीम कोर्ट में मध्य प्रदेश से जुड़े आरक्षण मामलों पर सुनवाई हुई. इस दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल और महाधिवक्ता उपस्थित रहे और उन्होंने अपना पक्ष रखा. सुनवाई पूरी होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए कहा कि इन मामलों की सुनवाई उस अदालत में होना अधिक उचित होगा, जहां से वे मूल रूप से संबंधित हैं. इसी आधार पर कोर्ट ने मध्य प्रदेश से जुड़े सभी आरक्षण मामलों को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट को स्थानांतरित करने का निर्देश दिया. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी पक्षों को हाईकोर्ट के समक्ष अपने तर्क, दस्तावेज और कानूनी आधार विस्तार से रखने की पूरी स्वतंत्रता रहेगी. यानी अब इस मामले की पूरी सुनवाई और तथ्य जांच हाईकोर्ट में ही की जाएगी. यह मामला काफी समय से चल रहा विवाद है, जिसमें राज्य सरकार के फैसलों को पहले हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी. हाईकोर्ट में सुनवाई के बाद कुछ पक्ष फैसले से संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने इसे आगे बढ़ाते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. इसी वजह से मामला सर्वोच्च स्तर तक पहुंचा, जहां पूरे विवाद को देखते हुए आगे की सुनवाई फिर से संबंधित हाईकोर्ट में कराने का रास्ता तय किया गया. अब आगे की सुनवाई और आखिरी निर्णय मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा कानून के प्रावधानों के अनुसार किया जाएगा. इससे यह उम्मीद जताई जा रही है कि मामले की गहराई से जांच के बाद स्पष्ट कानूनी स्थिति सामने आएगी।

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